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Saturday, May 16, 2026

यहया – सादिक़ चुबक | अनुवाद: डॉ. अज़ीज़ महदी

सादिक़ चूबक (१९१६-१९९८ ई) ईरान के मशहूर लेखकों में से एक थेI उनकी लघु कथाओं की तुलना फारसी लघु चित्रकला के साथ की जाती हैI चूबक एक प्रकृतिवादी व्यक्ति थे और उनकी कथाएँ समाज के उस अँधेरे पहलू को दर्शाती थीं, जिसके बारे में बाकी लोग चर्चा करने से कतराते थेI वह फ़ारसी आधुनिक गद्य साहित्य के सबसे महत्वपूर्ण और प्रभावशाली लेखकों में गिने जाते हैं। उन्हें अक्सर “फ़ारसी यथार्थवाद” (Persian Realism) और “सामाजिक यथार्थवाद” के अग्रणी लेखकों में माना जाता है। उनकी शैली सीधे-सादे लेकिन गहरे मानवीय अनुभवों को उजागर करती है। वे उन लेखकों में से हैं जिन्होंने आधुनिक फ़ारसी साहित्य को लोकभाषा, यथार्थवादी पात्रों और समाज की कड़वी सच्चाइयों से जोड़ा। उनका प्रारंभिक जीवन समुद्र तटीय शहर में बीता, जहाँ से उन्हें समाज के निचले तबके के जीवन को देखने और समझने का मौका मिला। यह अनुभव बाद में उनकी कहानियों में झलकता है, जहाँ वे आम आदमी के दुख-सुख को गहराई से चित्रित करते हैं। चूबक ने अपने समय में आम आदमी की आवाज़ को साहित्य में शामिल किया। वे पात्रों को आदर्श न बनाकर– उनकी कमजोरियाँ, इच्छाएँ और संघर्ष सहित, यथार्थ में दिखाते हैं। उन्होंने साहित्यिक फ़ारसी को सिर्फ़ अभिजात वर्ग की भाषा न मानकर, आम आदमी की बोली और मुहावरों को अपनी रचनाओं में शामिल किया। उनकी कहानियों में गरीबी, भ्रष्टाचार, धर्मांधता, पारिवारिक दमन, और नैतिक पाखंड पर गहरी चोट दिखाई देती है।

आज भी चूबक का साहित्य उतना ही प्रासंगिक है, क्योंकि यह समाज में मौजूद अन्याय, वर्गभेद और मानवीय संघर्ष को दर्शाता है। उनके पात्र आज के पाठक को भी अपने जैसे लगते हैं। साहित्यिक दृष्टि से उन्होंने जिस तरह यथार्थवाद, मनोविश्लेषण और सामाजिक आलोचना को जोड़ा, वह फ़ारसी साहित्य को वैश्विक साहित्य से जोड़ने में मदद करता है।

यहया ग्यारह साल का था और वह पहला दिन था कि वह “डेली न्यूज़” अख़बार बेचना शुरू करना चाहता थाI अख़बार के दफ्तर में मैनेजर और खुद उसकी उम्र के कई बच्चों ने –जो कि उसी की तरह अख़बार बेचते थे- कई बार “डेली न्यूज़” नाम का उच्चारण करके उसको सुनाया और वह भी, बहुत ही फुर्ती से उस नाम को सीख गया; उसकी नज़रों में वह नाम दीज़ी[1] जैसा ही थाI उसने कई बार बिना झिझके, मन ही मन दोहराना शुरू किया: “डेली न्यूज़! डेली न्यूज़! डेली न्यूज़!” और उस नाम को दोहराते हुए अख़बार के दफ्तर से बाहर आ गयाI

उसने गली में पहुँचते ही भागना शुरू कर दियाI वह जोर-जोर से चिल्ला रहा था “डेली न्यूज़! डेली न्यूज़!” वह अपने आस पास किसी और चीज़ पर भी ध्यान नहीं दे रहा थाI सिर्फ अपना काम करने में पूरी तरह से मग्न थाI वह उस नाम को जितना भी दोहराता था और लोग उससे वह अख़बार खरीदते थे; वह उतना ही अपने आप से खुश होता चला जाता थाI उसने अख़बार की कई प्रतियाँ बेच भी दीं और उसे वह ‘नाम’ अभी तक याद थाI लेकिन उस समय जब उसने पांच ‘रियाल[2]’ का बकाया पैसा एक आदमी को दिया और दस पैसे छुट्टे ना होने पर उस आदमी ने वह पैसे उसको रख लेने को कहा और चला गया और याहया ख़ुशी से फूला नहीं समा रहा था; ठीक उसी समय उसने अपने दिमाग़ पर जितना भी जोर डाला, लेकिन अख़बार का नाम उसे याद ही नहीं आयाI वह अखबार का नाम पूरी तरह से भूल चुका थाI

अचानक एक अजीब से डर ने उसे घेर लिया थाI वह कुछ पल के लिए एक जगह खड़ा रहा और सड़क की ओर निगाहें गड़ाए गौर से देखता रहाI उसने दुबारा दौड़ना शुरू कर दियाI उसके बिना आवाज़ लगाए और चिल्लाए हुए, लोगों ने अख़बार की कई प्रतियाँ उससे खरीद लींI लेकिन अख़बार का नाम वह पूरी तरह से भूल चुका थाI

यहया उन लोगों के मुंह की तरफ गौर से देखता था जो उससे अख़बार खरीद रहे थे; इस उम्मीद के साथ कि शायद अख़बार का नाम उनमें से किसी एक खरीदार के मुंह से सुनाई दे जायेI लेकिन उन सभी लोगों के चेहरे उखड़े हुए और गंभीर थे; और वह लोग यहया की सूरत की तरफ देखे बिना ही उससे अख़बार लेकर अपने रास्ते चले जाते थेI

बेचारे यहया को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करे? उसने अपने आस पास नज़र दौड़ाई कि शायद उसके उन साथी बच्चों में से कोई उसे दिख जाये और वह अख़बार का नाम उससे पूछ सके; लेकिन अफ़सोस कोई भी दिखाई नहीं दियाI उसे कई बार “दीज़ी” शब्द अपनी आँखों के सामने कलाबज़ियाँ खाता हुआ दिखाई दिया; लेकिन वह उससे भी कुछ समझ नहीं पा रहा थाI सड़क के फुटपाथ पर बहुत सारी “दीज़ी” उसके सामने परेड करती हुई नज़र आ रही थीं और शायद एक दो बार तो अख़बार का नाम भी एक चिंगारी की तरह उसके दिमाग में चमका, लेकिन उसने जैसे ही उसे पकड़ना चाहा, चिंगारी बुझ गयीI

उसने अपना सिर नीचे लटका रखा था और धीरे धीरे पैदल चल रहा थाI अख़बार के पुलिंदे को भी उसने अपने बगल में छिपा कर जोर से दबा रखा थाI उसे इस बात का डर था कि क्यूंकि वह अख़बार का नाम भूल गया था, शायद वह अख़बार उससे छीन लिए जाएंI उसे रोना आ रहा था लेकिन आंसू की एक बूँद भी उसकी आँखों से बाहर नहीं आ रही थीI वह सड़क पर चलते किसी व्यक्ति से पूछना चाहता था कि अख़बार का नाम क्या है लेकिन उसे यह काम करने में शर्म तो आ ही रही थी और साथ ही साथ वह यह काम करने से डर भी रहा थाI

अचानक उसके चेहरे का रंग बदल गया और एक बड़ी सी मुस्कुराहट उसके होंठों पर आ गयीI वह ख़ुशी के मारे फूला नहीं समा रहा था और उसके चेहरे पर यह ख़ुशी साफ़ दिखाई दे रही थीI उसने फिर से दौड़ लगाना और चिल्लाना शुरू कर दियाI

“दीज़ूस! दीज़ूस!”

आखिरकार उसे अख़बार का नाम याद आ गया थाI

— अंत

लेखक फ़ारसी भाषा एवं साहित्य के विद्वान हैं और भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान (IIAS), शिमला के पूर्व फ़ेलो हैं।

[1] ईरान का एक मशहूर भोजन जो लगभग सभी वर्गों के लोगों का पसंदीदा भोजन माना जाता हैI

[2] ईरानी मुद्रा का नाम

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